" हिन्दू " शब्द की प्राचीनता
हिमालयं समारभ्य
यावदिन्दु सरोवरम् !
तम् देव निर्मितम् देशं
हिन्दुस्थानं प्रचक्षते !! [ बार्हस्पत्य शास्त्र ]
अर्थात >> हिमालय के "हि" और इन्दू सरोवर [
कन्याकुमारी ] के "न्दू" [ हिन्दू ] शब्दोपलक्षित देश का नाम हिन्दुस्थान
है !!
हिनस्ति तपसा पापान दैहिकान दुष्ट
मानसान !
हेतिभिः शत्रु वर्गांश्च
स हिंदुरभिधीयते !! [ पारिजात हरण नाटक ]
अर्थात >> जो अपने दैहिक - मानसिक
पापों का तपश्चर्या के द्वारा विनाश करे और शस्त्रास्त्र से शत्रु समूह का सर्वनाश
करे वह हिन्दू कहा जाता है !!
हिंसया दूयते यश्च
सदाचरण तत्परः !
वेद गौ प्रतिमा सेवी स हिन्दू मुख वर्ण भाक् !! [
वृद्ध स्मृति ]
अर्थात >> जो पापयुक्त हिंसा से दूर रहे , सदाचरण में तत्पर रहे अर्थात
ब्राह्मण आदि वर्ण अधिकार के अनुसार अपने अपने आचरणों और कर्मों में श्रेष्ठ हों ,
वेद - गौ - प्रतिमाओं की सेवा करने वाला ही हिन्दू नाम का
अधिकारी है !!
हिंदु धर्म प्रलुप्तारो
जायन्ते चक्रवर्तिन:
! [मेरु तंत्र प्रकाश ]
अर्थात > कलियुग में हिंदु धर्म का लोप करने वाले चक्रवर्ती हो
जायेंगे , और !!
अवनी यवनै: क्रांता हिंदवो
विंध्य माविशन ! [ कालिका
पुराण ]
अर्थात >> पृथ्वी जब यवन , म्लेच्छ प्रायः लोगों से भर जाएगी हिन्दू [ अपनी
संस्कृति बचाने के लिए ] विंध्याचल में [ स्थित दुर्गा की शरण में ] जायेंगे
!!
एक बात
अवश्य ध्यान रखें >>> सनातन हिन्दू धर्म
पृथ्वी से कभी समाप्त नहीं होगा क्योकि ----------
योसावास्ते
योग सिद्धः कलापग्रामम् आश्रितः !
कले:
अन्ते सूर्यवंशम नष्टम् भावयिता पुनः
!!
देवापि:
योगमास्थाय कलापग्रामम् आश्रितः !
सोमवंशे
कलौ नष्टे कृतादौ स्थापयिष्यति !! [ श्रीमद भागवत ]
सूर्यवंशी राजा मरू तथा चंद्रवंशी राजा देवापि इस समय
भी कलाप ग्राम में योग साधना कर रहे हैं कलियुग में जब सूर्यवंश तथा चन्द्रवंश हो
जाएगा तब सतयुग प्रारम्भ में सूर्यवंशी राजा मरू सूर्यवंश की और चंद्रवंशी राजा देवापि चन्द्रवंश की स्थापना करेंगे !!
हर हर महादेव
सनातन राष्ट्र धर्म संस्कृति की सेवा में समर्पित ---------
<<== श्रीमद्भागवत एवं श्रीराम कथा प्रवक्ता ==>>
आचार्यगुरु ललितानंद 'व्यास '
वेद , कर्मकांड , ज्योतिष ,व्याकरणाचार्य [नरवर,नरोरा ] तंत्र , मन्त्र , यंत्र , [ श्री काशी ],
रत्न , रुद्राक्ष , ज्योतिष , वास्तु [ जयपुर ] ,
संपादक - श्री वैदिक पञ्चाङ्गम [गृहस्थ जंत्री ] , श्री गुरु जी काल निर्णय ,
पूर्व प्रधान संपादक -श्री वागनाथ पञ्चाङ्गम ,
पूर्व प्रधानाचार्य - श्री विश्वनाथ ज्योतिष-वेद विद्यालय [हरिद्वार ]
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ज्योतिष [ जन्म पत्र निर्माण - फलादेश ], तंत्र - मन्त्र - यंत्र , वास्तु , [ गृह निर्माण एवं दोष निवारण ] , रत्न - रुद्राक्ष एवं पूजन , जप , हवन आदि कर्मकांड तथा अध्यात्म से सम्बंधित अन्य समस्याओं - शंकाओं के प्रामाणिक परामर्श एवं समाधान के लिए तथा गौशालाओं की सेवार्थ निःशुल्क श्रीमद भागवत एवं श्री राम कथा आदि ज्ञान यज्ञों के सफल आयोजन के लिए निःसंकोच संपर्क करें ।