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होलिका दहन कब करें आचार्यगुरु ललितानंद
।। हर हर महादेव।। होलिका दहन शास्त्रानुसार कब करें, 06 मार्च या 07 मार्च को ??
इस वर्ष संवत् 2079 ईस्वी सन् 2022-23 में होलिका दहन के संबंध में कुछ जनों का कहना है कि होलिका दहन 6 मार्च को हो और कुछ का कहना है कि होलिका दहन 7 मार्च को होना चाहिए। आइए देखते हैं कि शास्त्रों के सिद्धांत के अनुसार होलिका दहन 6 मार्च को करें या 7 मार्च को !!
सबसे पहले ये बता दें कि भारत में अलग अलग स्थानों पर होलिका दहन 6 मार्च और 7 मार्च दोनों ही दिन को होगा। स्थान ओर तिथि के आधार पर कुछ स्थानों पर 6 मार्च को और कुछ स्थानों पर 7 मार्च को होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत होगा। लेकिन जिस स्थान पर 6 मार्च को होलिका दहन होना चाहिए वहां पर यदि 7 मार्च को किया जाए और 7 मार्च वाले स्थान पर 06 मार्च को होलिका दहन कर लिया जाए तो यह पूर्ण रूप से अपराध होगा।
आइए देखते हैं कि किन स्थानों पर 6 मार्च और किन स्थानों पर 7 मार्च को होलिका दहन किया जाए और क्यों किया जाए ?
पूर्णिमा प्रारंभ 06 मार्च 2023 को शाम 04:17 से दूसरे दिन 07 मार्च को शाम 06:10 तक।। भद्रा प्रारंभ 6 मार्च 2023 को शाम 04:17 से दूसरे दिन 07 मार्च को सुबह 05:13 तक।। भद्रा का मुख काल 06/07 मार्च की रात्रि 02 से 04:08 तक। भद्रा पुच्छ काल 06/07 मार्च की रात्रि 12:41 से 02 तक। प्रदोष काल ( दिल्ली के सूर्यास्त 06:20 के अनुसार ) 06:20 से 08:48 तक। प्रदोष काल हर स्थान पर अपने सूर्यास्त के समय से (मध्यम मान से) लगभग दो से ढाई घंटा रहता है। होलिका दहन का प्रमुख समय पूर्णिमा तिथि का प्रदोष काल होता है। भद्रा योग में होलिका दहन नहीं करना चाहिए। यदि प्रदोष के समय भद्रा दोष हो तो प्रदोष काल में भद्रा के पुच्छ काल में होलिका दहन करे। प्रदोष काल में भद्रा पुच्छकाल ना मिले तो, भद्रा के मुख काल का त्याग करके शेष भद्रा काल में भी प्रदोष काल में ही होलिका दहन करे।(धर्म सिंधु)
ऊपर की गणितीय प्रक्रिया और होलिका दहन के शास्त्रीय सूत्रों के आधार पर स्पष्ट है कि पूर्णिमा 06 मार्च को ही प्रदोष काल में है, अतः भद्रा होने पर भी भद्रा का मुखकाल त्याग कर प्रदोष काल में ही 06 मार्च को ही होलिका दहन करना शास्त्रोचित है। हां! ये ध्यान रखें कि 07 मार्च को पूर्णिमा शाम 06:10 पर समाप्त होगी इसलिए जिन स्थानों पर 07 मार्च को सूर्यास्त 06:10 से पहले हो रहा हो, उन स्थानों के लोग 07 मार्च को अपने स्थान के सूर्यास्त के बाद लगभग दो-ढाई घंटे के भीतर ही होलिका दहन कर सकते हैं। क्योंकि इन स्थानों पर पूर्णिमा प्रदोष काल को स्पर्श कर लेगी।।
प्रश्न : सभी लोग 06 मार्च को या 07 को ही होलिका दहन क्यों नहीं कर सकते ? जैसा कि ऊपर लिखा है कि होलिका दहन का संबंध प्रदोष काल में उपस्थित पूर्णिमा से है। अलग अलग स्थानों पर सूर्यास्त का अलग अलग समय होने के कारण जहां पर सूर्यास्त 06:10 के बाद होगा वहां पर तो 07 मार्च को (पूर्णिमा शाम 06:10 पर समाप्त हो जाने से) प्रदोष काल में पूर्णिमा होगी ही नहीं और 06 मार्च को प्रदोष में पूर्णिमा के होने पर भद्रा मुख रहित प्रदोष काल में होलिका दहन का आदेश शास्त्रों में उपस्थित है, इसलिए 06 मार्च को जिन स्थानों पर सूर्यास्त 06:10 के बाद होगा उन स्थान वाले सज्जन 06 मार्च को ही अपने स्थान पर सूर्यास्त होने के बाद लगभग दो-ढाई घंटे के भीतर ही होलिका दहन करेंगे, इन स्थानों के सज्जन यदि 07 मार्च को होलिका दहन करेंगे तो अपराध होगा। परन्तु 07 मार्च को जहां सूर्यास्त 06:10 से पहले हो रहा है तो उन स्थान पर प्रदोष काल में पूर्णिमा प्राप्त होने से उन स्थान के सज्जन 07 मार्च को ही अपने स्थान पर सूर्यास्त होने के बाद लगभग दो-ढाई घंटे के भीतर ही होलिका दहन करेंगे, इन स्थानों के सज्जन यदि 06 मार्च को होलिका दहन करेंगे तो अपराध होगा।
प्रश्न : यह कैसे जाने कि होलिका दहन किस स्थान पर 6 मार्च को करें और किस स्थान पर 7 मार्च को करें? इसके लिए आगे दी गई सूची देखें। 6 मार्च को होलिका दहन वाले संभावित स्थल -- दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, अधिकांश आंध्र प्रदेश तथा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद, मेरठ, मुरादाबाद, संभल, बुलंदशहर, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, बदायूं, एटा, मैनपुरी, मथुरा, चित्रकूट, कानपुर, झांसी, फतेहपुर आदि।।
7 मार्च को होलिका दहन वाले संभावित स्थल -- अधिकांश नेपाल तथा मध्य प्रदेश के कुछ नगर, उड़ीसा, बंगाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश में बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, फैजाबाद, अयोध्या, अमेठी, प्रतापगढ़, प्रयाग, वाराणसी, गोरखपुर आदि।।
यदि ऊपर की सूची में आपके नगर का नाम नहीं है तो निराश ना हो, आप अपने आचार्य, कुलगुरू या गूगल की सहायता से 6 और 7 मार्च 2023 का सूर्यास्त का समय प्राप्त करें और ऊपर दिए हुए गणित से यह सुनिश्चित करें कि आपके स्थान के सूर्यास्त के बाद यदि पूर्णिमा का समय है तो आप निश्चिंत होकर निश्चित रूप से 7 मार्च को होलिका दहन करें, अन्यथा की स्थिति में 6 मार्च को होलिका दहन करें।।
ये अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि 06 मार्च को होलिका दहन स्थान वाले 07 मार्च का और 07 मार्च को होलिका दहन स्थान वाले 06 मार्च का प्रयोग ना करें।।
विद्वतभक्तानामनुचर: - आचार्य'गुरु' ललितानंद व्यास ( श्रीमद्भागवत एवं श्री रामकथा प्रवक्ता) 94108-82948