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Saturday, 16 July 2016
गुरुपूर्णिमा
गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर ! गुरु साक्षात् परमं ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: !!
अर्थात-- गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है । ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं ।
- आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं।
- इसी दिन व्यास जी का जन्मदिन होने से इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
- इस दिन गुरु पूजा का विधान है।यह पर्व पूर्ण श्रद्धा विश्वास भक्ति से मनाना चाहिए,
- गुरु को ऊंचे सुसज्जित आसन पर बैठाकर रोली चावल पुष्प माला आदि से गुरु की पूजा करके उन्हें यथा योग्य वस्त्र, फल, दक्षिणा आदि अर्पित करना चाहिए।
- यदि गुरु की प्रत्यक्ष संगति ना हो तो उनके चित्र , पादुका आदि प्रतीक चिन्ह की पूजा करनी चाहिए।
- गुरु के चरणों में दण्डवत लेटकर बाएं हाथ से सीधा और सीधे हाथ से बायां पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
Sunday, 12 June 2016
श्री विष्णवे नमः
निर्जला एकादशी १६ जून को
भगवान विष्णु को एकादशी का व्रत अतिप्रिय है ! ये एकादशी व्रत एक वर्ष में २४ या २६ होती हैं !
सभी एकादशियों मैं निर्जला एकादशी का माहात्म्य सर्वाधिक है !
एकादशी व्रत माहात्म्य के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत को विधिवत करने से पुरे वर्ष भर की एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त हो जाता है !
सामान्यतया निर्जला एकादशी का ये पर्व गंगा दशहरा के दूसरे दिन अथवा कभी कभी गंगा दशहरा हो जाता है किन्तु , इस वर्ष [ २०१६ में ] गंगा दशहरा १४ जून को और निर्जला एकादशी का व्रत १६ जून को ही स्मार्त -वैष्णव [गृहस्थ-सन्यासी] आदि सभी के द्वारा मनाया जाना शास्त्रानुसार आदेशित एवं मान्य है ! क्योकि एकादशी व्रत की समाप्ति तिथि द्वादशी १७ जून को ही प्राप्त है !
इस निर्जला एकादशी को ही भीमसेनी एकादशी जाता है
Saturday, 11 June 2016
!! नमामि गंगे तव पाद पंकजम !!
गंगा दशहरा 14 जून मंगल को
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पुर्वान्ह व्यापिनी दशमी को पृथ्वी पर माँ गंगा का अवतरण हुआ था ! इसलिये पुर्वान्ह व्यापिनी दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है !!
इस वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि १४ और १५ जून दो दिन व्याप्त है तब गंगा दशहरा पर्व किस दिन मनाया जाए ??
स्कन्द पुराण के अनुसार > ज्येष्ठ मासि सिते पक्षे दशम्याम् बुध् हस्तयो: ! व्यतीपाते गरानन्दे कन्या चन्द्रे वृषे रवौ !!
अर्थात > ०१- ज्येष्ठ मास ०२- शुक्ल पक्ष ०३- दशमी तिथि ०४- बुधवार ०५- हस्त नक्षत्र ०६- व्यतिपात योग ०७- गर करण ०८- आनंद योग ०९- वृष राशि का सूर्य १०- कन्या राशि चन्द्रमा !! ये दस योग जिस दिन भी प्राप्त हो जाए उसी दिन गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है !!
किन्तु यदि ये दस के दस योग दोनों ही दिनों मैं प्राप्त ना हो तब ये पर्व किस दिन मनाया जाये ??
ऐसी स्थिति में धर्म सिंधु का स्पष्ट कथन है कि > यत्र बहूनां योगः सा ग्राह्या ! अर्थात स्कन्द पुराणोक्त दस योगो में से अधिकाधिक योग दोनों दिनों में से जिस दिन भी प्राप्त हो उसी दिन गंगा दशहरा मनाना चाहिए !
किन्तु अगर दोनों ही दिन बराबर योग प्राप्त हों तो किस दिन मनाया जाए ??
तब स्कन्द पुराण का कहना है कि > दशमी तु प्रकर्तव्या सदुर्गा द्विजसत्तम !! अर्थात दोनों ही दिन बराबर योग प्राप्त हों तो गंगा दशहरा का पर्व प्रथम [ पहले ] दिन ही मनाना चाहिए !!
इस वर्ष १४ जून २०१६ को स्कन्द पुराणोक्त दस योगो में से ०१- ज्येष्ठ मास ०२- शुक्ल पक्ष ०३- दशमी तिथि ०४- हस्त नक्षत्र ०५ - वृष राशि का सूर्य ०६ - कन्या राशि चन्द्रमा !! ये संयोग प्राप्त हैं !!
१५ जून को ०१- ज्येष्ठ मास ०२- शुक्ल पक्ष ०३- दशमी तिथि[तीन मुहूर्त से भी कम है] ०४- बुधवार ०५- गर करण ०६- कन्या राशि का चन्द्रमा [प्रातः केवल ०६-४७ तक ही उपलब्ध है ] !!
+ ध्यान दें कि ब्रह्म पुराण के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र का संयोग दस पापों को हरने वाला बताया है >>
ज्येष्ठ मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता !हरते दश पापानि तस्माद दशहरा स्मृता !! [ ब्रह्म पुराण ]
+भविष्य पुराण के अनुसार तो ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र मंगलवार का संयोग सभी पापों को हरने वाला बताया है >>
ज्येष्ठ शुक्ल दशम्यां तु भवेद भोम दिनम यदि ! ज्ञेया हस्तर्क्ष संयुक्ता सर्व पापहरा तिथि !![भविष्य पुराण ] :
>> स्पष्ट है कि ये हस्त नक्षत्र तथा मंगल वार दशमी तिथि के साथ केवल १४ जून को ही प्राप्त है!!
>> स्कन्द, ब्रह्म, भविष्य पुराणादि के वचनानुसार १४ जून २०१६ को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि के साथ हस्त नक्षत्र , मंगलवार , कन्या राशि के चन्द्र , वृष राशि सूर्य का संयोग गंगा दशहरा पर्व को अति पुण्यदायी बना रहा है !!
>>इस दिन श्री गंगा का स्नान, पूजन, अन्न, वस्त्र आदि का दान, पितृ तर्पण, उपवास आदि किया जाए तो सभी प्रकार के पाप किंवा दस प्रकार के पाप [ तीन प्रकार के कायिक, चार प्रकार के वाचिक और तीन प्रकार के मानसिक पाप] दूर होते है
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सनातन राष्ट्र धर्म संस्कृति की सेवा में समर्पित ---------
<< श्रीमद्भागवत एवं श्रीराम कथा प्रवक्ता >>
****** आचार्यगुरु ललितानंद 'व्यास '********
वेद , कर्मकांड , ज्योतिष ,व्याकरणाचार्य [नरवर,नरोरा ]
तंत्र , मन्त्र , यंत्र , [ श्री काशी ],
रत्न , रुद्राक्ष , ज्योतिष , वास्तु [ जयपुर ] ,
संपादक - श्री वैदिक पञ्चाङ्गम [गृहस्थ जंत्री ] , श्री गुरु जी काल निर्णय ,
पूर्व प्रधान संपादक -श्री वागनाथ पञ्चाङ्गम ,
पूर्व प्रधानाचार्य - श्री विश्वनाथ ज्योतिष-वेद विद्यालय [हरिद्वार ]
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ज्योतिष [ जन्म पत्र निर्माण - फलादेश ], तंत्र - मन्त्र - यंत्र , वास्तु , [ गृह निर्माण एवं दोष निवारण ] , रत्न - रुद्राक्ष एवं पूजन , जप , हवन आदि कर्मकांड तथा अध्यात्म से सम्बंधित अन्य समस्याओं - शंकाओं के प्रामाणिक परामर्श एवं समाधान के लिए तथा गौशालाओं की सेवार्थ निःशुल्क श्रीमद भागवत एवं श्री राम कथा आदि ज्ञान यज्ञों के सफल आयोजन के लिए निःसंकोच संपर्क करें ।
Friday, 6 May 2016
शनि ग्रह द्वारा दिए जाने वाले कष्ट , विघ्न आदि की शान्ति के लिए शनिवार के दिन पीपल के नीचे बैठ कर
एवम अन्य दिन घर में नित्य प्रति पूजा के समय पाठ करें ! ऐसा करने से साढ़ेसाती और ढैया की दुख़द पीड़ा
नहीं होती !!
पिप्पलाद उवाच -----
[ श्री ] नमस्ते कोण संस्थाय पिंगलाय नमोस्तुते !
नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोस्तुते !! 01 !!
नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चान्तकाय च !
नमस्ते यम संज्ञाय नमस्ते सौरये विभो !! 02 !!
नमस्ते मंद संज्ञाय शनैश्चर नमोस्तुते !
प्रसादं कुरु देवेश दीनस्य प्रणतस्य च !! 03 !!
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Tuesday, 3 May 2016
" हिन्दू " शब्द की प्राचीनता
हिमालयं समारभ्य
यावदिन्दु सरोवरम् !
तम् देव निर्मितम् देशं
हिन्दुस्थानं प्रचक्षते !! [ बार्हस्पत्य शास्त्र ]
अर्थात >> हिमालय के "हि" और इन्दू सरोवर [
कन्याकुमारी ] के "न्दू" [ हिन्दू ] शब्दोपलक्षित देश का नाम हिन्दुस्थान
है !!
हिनस्ति तपसा पापान दैहिकान दुष्ट
मानसान !
हेतिभिः शत्रु वर्गांश्च
स हिंदुरभिधीयते !! [ पारिजात हरण नाटक ]
अर्थात >> जो अपने दैहिक - मानसिक
पापों का तपश्चर्या के द्वारा विनाश करे और शस्त्रास्त्र से शत्रु समूह का सर्वनाश
करे वह हिन्दू कहा जाता है !!
हिंसया दूयते यश्च
सदाचरण तत्परः !
वेद गौ प्रतिमा सेवी स हिन्दू मुख वर्ण भाक् !! [
वृद्ध स्मृति ]
अर्थात >> जो पापयुक्त हिंसा से दूर रहे , सदाचरण में तत्पर रहे अर्थात
ब्राह्मण आदि वर्ण अधिकार के अनुसार अपने अपने आचरणों और कर्मों में श्रेष्ठ हों ,
वेद - गौ - प्रतिमाओं की सेवा करने वाला ही हिन्दू नाम का
अधिकारी है !!
हिंदु धर्म प्रलुप्तारो
जायन्ते चक्रवर्तिन:
! [मेरु तंत्र प्रकाश ]
अर्थात > कलियुग में हिंदु धर्म का लोप करने वाले चक्रवर्ती हो
जायेंगे , और !!
अवनी यवनै: क्रांता हिंदवो
विंध्य माविशन ! [ कालिका
पुराण ]
अर्थात >> पृथ्वी जब यवन , म्लेच्छ प्रायः लोगों से भर जाएगी हिन्दू [ अपनी
संस्कृति बचाने के लिए ] विंध्याचल में [ स्थित दुर्गा की शरण में ] जायेंगे
!!
एक बात
अवश्य ध्यान रखें >>> सनातन हिन्दू धर्म
पृथ्वी से कभी समाप्त नहीं होगा क्योकि ----------
योसावास्ते
योग सिद्धः कलापग्रामम् आश्रितः !
कले:
अन्ते सूर्यवंशम नष्टम् भावयिता पुनः
!!
देवापि:
योगमास्थाय कलापग्रामम् आश्रितः !
सोमवंशे
कलौ नष्टे कृतादौ स्थापयिष्यति !! [ श्रीमद भागवत ]
सूर्यवंशी राजा मरू तथा चंद्रवंशी राजा देवापि इस समय
भी कलाप ग्राम में योग साधना कर रहे हैं कलियुग में जब सूर्यवंश तथा चन्द्रवंश हो
जाएगा तब सतयुग प्रारम्भ में सूर्यवंशी राजा मरू सूर्यवंश की और चंद्रवंशी राजा देवापि चन्द्रवंश की स्थापना करेंगे !!
हर हर महादेव
सनातन राष्ट्र धर्म संस्कृति की सेवा में समर्पित ---------
<<== श्रीमद्भागवत एवं श्रीराम कथा प्रवक्ता ==>>
आचार्यगुरु ललितानंद 'व्यास '
वेद , कर्मकांड , ज्योतिष ,व्याकरणाचार्य [नरवर,नरोरा ] तंत्र , मन्त्र , यंत्र , [ श्री काशी ],
रत्न , रुद्राक्ष , ज्योतिष , वास्तु [ जयपुर ] ,
संपादक - श्री वैदिक पञ्चाङ्गम [गृहस्थ जंत्री ] , श्री गुरु जी काल निर्णय ,
पूर्व प्रधान संपादक -श्री वागनाथ पञ्चाङ्गम ,
पूर्व प्रधानाचार्य - श्री विश्वनाथ ज्योतिष-वेद विद्यालय [हरिद्वार ]
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ज्योतिष [ जन्म पत्र निर्माण - फलादेश ], तंत्र - मन्त्र - यंत्र , वास्तु , [ गृह निर्माण एवं दोष निवारण ] , रत्न - रुद्राक्ष एवं पूजन , जप , हवन आदि कर्मकांड तथा अध्यात्म से सम्बंधित अन्य समस्याओं - शंकाओं के प्रामाणिक परामर्श एवं समाधान के लिए तथा गौशालाओं की सेवार्थ निःशुल्क श्रीमद भागवत एवं श्री राम कथा आदि ज्ञान यज्ञों के सफल आयोजन के लिए निःसंकोच संपर्क करें ।
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