Search This Blog

Sunday, 29 July 2018

श्री गुरु पूर्णिमा के दिव्य पावन अवसर पर वैदिक साधना पीठ- नरौरा पर आगरा, हरिगढ़, आदि स्थानों से पधारे सनातन धर्म प्रेमी श्रद्धालु भक्तजनों ने आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी महाराज के निर्देशन में श्री गणपति स्मरण पूर्वक सृष्टि के सर्वप्रथम गुरु देवाधिदेव महादेव का पूजन किया |  इसके उपरांत ज्ञानियों में अग्रगण्य श्री हनुमान जी महाराज के श्री चरणों में वंदन स्वरूप श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया गया | सभी शिष्य, यजमान, भक्तजनों ने आचार्यगुरु ललितानंद जी के प्रति यथा शक्ति श्रद्धा सुमन अर्पित करेक उनका आशीर्वाद प्राप्त किया |

आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से गुरु की आवश्यकता पर प्रकाश डाला | उन्होंने बताया की गुरु शिष्य एक परम्परा है जो सृष्टि काल से चली आ रही है | गुरु शिष्य  परम्परा सनातन हिन्दू धर्म की तो नींव है | शिष्य को गुरु से सभी अच्छी बातें ले लेनी चाहिए | यदि गुरु में कोई बुराई हो तो उसको ग्रहण नहीं करना चाहिए | गुरु भगवत्प्राप्ति/आत्मशांति/ के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है | गुरु भगवान नहीं है |  जो भी गुरु अपने चित्र की पूजा करवाए, गले में पहनाये, भगवान से ऊपर/ज्यादा खुद को घोषित करे वो गुरु नहीं गुरुर/अभिमानी /अहंकारी /घमंडी होता है | ऐसे गुरुओं से / लोगों से दूर रहना चाहिए |

सबसे महत्त्व पूर्ण और ध्यान देने योग्य बात ये  है की गुरु किसको बनायें, कैसे बनाएं, ये जानकारी वतमान में बहुत काम लोगों को है | आचार्यगुरु जी ने बताया की इन सब बातो की जानकारी सभी आम लोगों को होनी चाहिए इसके लिए सरल हिंदी भाषा में "गुरु किसको बनाएं" नाम की पुस्तक प्रकाशित की गई है | जो गुरु शिष्य परम्परा की आवश्यकता, गुरु की पात्रता, गुरु  मन्त्र आदि के विषय का ज्ञान देगी | आचार्यगुरु जी के प्रवचनों के उपरांत सभी भाई - बहिनों ने भगवद भजनों का वाचन और श्रवण किया | भजनों के वाचन में एंजल प्ले स्कूल की शिक्षिकाओं ने बहुत सुन्दर सहभागिता की |

चूँकि गुरु पूर्णिमा की रात्री में चंद्र ग्रहण होने से सूतक काल दोपहर 02 - 54 से प्रारम्भ होने के कारण सूतक काल प्रारम्भ होने से पूर्व ही सभी उपस्थित जनों को भोजन प्रसाद करके विदा किया गया | कुछ श्रद्धालु आचार्यगुरु जी के सानिद्ध्य में ग्रहण काल में साधना हेतु रुके रहे ||





Sunday, 20 May 2018

श्रीगंगा दशहरा पर्व कब मनाये 24 मई या 22 जून ??
श्रीगंगा दशहरा पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को अधिकमास यानी लोंद के महीने में ही मनाने के लिए धर्म सिंधु आदि ग्रंथों स्पष्ट निर्देश हैं >>>


Monday, 12 February 2018

 
श्रीमहाशिवरात्रि भ्रम निवारण

अलीगढ़ में पत्रकार वार्ता

Wednesday, 7 February 2018

जो भी महानुभाव / आचार्य 13 या 14 फरवरी 2018 दोनो में से किसी भी एक तारीख को ही श्रीमहा शिवरात्री पर्व पूरे भारत वर्ष में मनाने की सूचना प्रसारित कर रहे हैं .. उनसे निवेदन है 13 या 14 फरवरी 2018  दोनो में से किसी भी एक तारीख को ही श्रीमहा शिवरात्री पर्व पूरे भारत में मनाने के सम्बन्ध में शास्त्रीय प्रमाण प्रस्तुत करते हुए समाज को दिग्दर्शन कराएं |

सनातन धर्म - राष्ट्र - संस्कृति की सेवा में समर्पित वैदिक साधना पीठ के आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी के अध्ययनानुसार श्रीमहा शिवरात्री का पर्व भारत में अलग - अलग स्थानो / नगरो में अलग - अलग दिन अर्थात कही 13 फरवरी मंगलवार को और कही 14 फरवरी बुधवार को मनाया जायेगा | इस भेद और अंतर का मूल कारण जानने के लिये तथा भारत वर्ष के किस भाग / नगर में किस दिन श्रीमहा शिवरात्री मनाई जानी चाहिए इसके स्पष्टीकरण के लिए नीचे दिये गये लेख को  ध्यान से पढ़ने का कष्ट करें >>>


Saturday, 3 February 2018

शिवरात्रि कब मनाये 13 फरवरी या 14 फरवरी----
प्रत्येक स्थान के अक्षांश - रेखांश, सूर्योदय - सूर्यास्त, दिनमान अलग -अलग होने से प्रत्येक स्थान पर अर्द्ध रात्रि का समय अलग अलग होता है || जिन नगरों का रेखांश 80 अंश से काम है वहां महाशिव रात्रि 13 फरवरी को तथा जिन नगरों का रेखांश 80 अंश से ज्यादा है वहां महाशिव रात्रि 14  फरवरी को मनाया जाना ही शास्त्र सम्मत है || 



विशेष है शिवरात्रि  इस वर्ष ------
निर्णय सिंधु में लिखा है --  इयं च रवि भौम सोमवारेषु शिव योगे चाति प्रशास्ता || अर्थात- यदि शिवरात्रि रविवार,  भौमवार, सोमवार, और शिव योग में हो तो अति उत्तम मानी जाती है | कुंडली में मंगल अशुभ हो, मंगली योग हो, भूमि - वाहन - बुद्धि - माता - ह्रदय रोग आदि समस्या हो तो इस भौमवती महाशिवरात्रि  पर शिवलिंग पूजन अभिषेक कराना लाभप्रद रहेगा ||