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Thursday, 19 October 2017
Thursday, 7 September 2017
Thursday, 24 August 2017
Saturday, 19 August 2017
Sunday, 6 August 2017
हरियाणा के इन ज्योतिषाचार्य बंधु ने रक्षाबंधन के सम्बन्ध में
ये निर्णय अपने लैटर पेड पर लिख कर दिया है |
-- आइये देखते हैं ये सूचना कितनी प्रामाणिक है-------
01 - इन ज्योतिषाचार्य बंधु ने ना तो ये स्पष्ट लिखा है की ये सूचना किस पंचांग के आधार पर दे रहे हैं |
-- क्या ये गणित इनका अपना किया हुआ है ??
02 - इन्होने चंद्र ग्रहण का समय रात्री 10 - 45 से रात्री 12 -45 तक लिखा है ||
- आइये देखते है प्रसिद्ध पंचांगों मैं ग्रहण का क्या समय दिया है --
श्रीगृहस्थ जंत्री = रात्री 10 - 52 से रात्री 12 - 49 तक
श्रीमार्तण्ड पंचांग = रात्री 10 - 52 से रात्री 12 - 49 तक
पंचांग दिवाकर = रात्री 10 - 52 - 56 से रात्री 12 - 48 - 09 तक
श्रीविश्वविजय पंचांग = रात्री 10 - 52 से रात्री 12 - 49 तक
भवानी शंकर निर्णय सागर पंचांग = रात्री 10 - 2 2 से रात्री 12 - 22 तक
विशेष ध्यान दें - भवानी शंकर निर्णय सागर पंचांगकी गणित सूक्ष्म नहीं अपितु स्थूल [ मोटी ] है | अतः इसके द्वारा दिए गए ग्रहण समय आदि को विद्वानो की सभा मैं स्वीकृत नहीं किये जाते |
आप स्वयं देख सकते हैं कि ग्रहण के किस समय को ज्यादा अनुपात मैं स्वीकार किया है | स्पष्ट है की ग्रहण का समय रात्री 10 - 52 से रात्री 12 - 49 तक ही बहुधा स्वीकृत है , रात्री 10 - 45 से रात्री 12 -45 तक नही ||
03 - इन ज्योतिषाचार्य बंधु ने सूतक काल का प्रारम्भ लिखा है दोपहर 01 - 30 -00 ||
-- जबकि ग्रहण का स्पष्ट सिद्धांत है की चंद्र ग्रहण के सूतक का प्रारम्भ ग्रहण से ठीक 09 घंटे पूर्व प्रारम्भ होता है | अब इन्ही ज्योतिषी के ग्रहण प्रारम्भ काल के अनुसार तो सूतक काल भी दोपहर 01 - 45 से प्रारम्भ होना चाहिए | इतनी स्थूल बात भी ये ज्योतिषी भूल गए क्या ??
ये निर्णय अपने लैटर पेड पर लिख कर दिया है |
-- आइये देखते हैं ये सूचना कितनी प्रामाणिक है-------
01 - इन ज्योतिषाचार्य बंधु ने ना तो ये स्पष्ट लिखा है की ये सूचना किस पंचांग के आधार पर दे रहे हैं |
-- क्या ये गणित इनका अपना किया हुआ है ??
02 - इन्होने चंद्र ग्रहण का समय रात्री 10 - 45 से रात्री 12 -45 तक लिखा है ||
- आइये देखते है प्रसिद्ध पंचांगों मैं ग्रहण का क्या समय दिया है --
श्रीगृहस्थ जंत्री = रात्री 10 - 52 से रात्री 12 - 49 तक
श्रीमार्तण्ड पंचांग = रात्री 10 - 52 से रात्री 12 - 49 तक
पंचांग दिवाकर = रात्री 10 - 52 - 56 से रात्री 12 - 48 - 09 तक
श्रीविश्वविजय पंचांग = रात्री 10 - 52 से रात्री 12 - 49 तक
भवानी शंकर निर्णय सागर पंचांग = रात्री 10 - 2 2 से रात्री 12 - 22 तक
विशेष ध्यान दें - भवानी शंकर निर्णय सागर पंचांगकी गणित सूक्ष्म नहीं अपितु स्थूल [ मोटी ] है | अतः इसके द्वारा दिए गए ग्रहण समय आदि को विद्वानो की सभा मैं स्वीकृत नहीं किये जाते |
आप स्वयं देख सकते हैं कि ग्रहण के किस समय को ज्यादा अनुपात मैं स्वीकार किया है | स्पष्ट है की ग्रहण का समय रात्री 10 - 52 से रात्री 12 - 49 तक ही बहुधा स्वीकृत है , रात्री 10 - 45 से रात्री 12 -45 तक नही ||
03 - इन ज्योतिषाचार्य बंधु ने सूतक काल का प्रारम्भ लिखा है दोपहर 01 - 30 -00 ||
-- जबकि ग्रहण का स्पष्ट सिद्धांत है की चंद्र ग्रहण के सूतक का प्रारम्भ ग्रहण से ठीक 09 घंटे पूर्व प्रारम्भ होता है | अब इन्ही ज्योतिषी के ग्रहण प्रारम्भ काल के अनुसार तो सूतक काल भी दोपहर 01 - 45 से प्रारम्भ होना चाहिए | इतनी स्थूल बात भी ये ज्योतिषी भूल गए क्या ??
Thursday, 3 August 2017
Sunday, 23 July 2017
मासों में श्रावण मास भगवान शिव को अतिप्रिय होने से श्रावण में भगवान शिव
की पूजा का विशेष महत्व है, अत: श्रावण मास में प्रतिदिन शिवोपासना का
विधान है | जो प्रतिदिन शिव पूजा न कर सकें उनको सोमवार को शिवपूजा अवश्य
करनी चाहिये और व्रत रखना चाहिये , क्योंकि सोमवार भगवान शंकर का प्रिय
दिवस है | 'शिवाभिषेक प्रिय:' के अनुसार शिवपूजन में भगवान का अभिषेक करने का
विशेष निर्देश एवं महतव है | शिव अभिषेक करने वाले साधक की समस्त कामनाएं
भगवान शिव पूर्ण करये हैं| शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य को अपनी
कामनाओं के अनुसार पृथक् पृथक् पदार्थों से शिव अभिषेक करना चाहिये | धन की
प्राप्ति हेतु गन्ने का रस एवं शहद से , पुत्र प्राप्ति हेतु गोदुग्ध एवं
मीठे जल से, बुद्धि प्राप्ति हेतु मीठे दुग्ध से तथा सामान्यतया जल से
अभिषेक करने पर भगवान शिव प्रसन्न होकर साधक की समस्त कामनाओं को पूर्ण करते हैं |
आचार्यगुरु ललितानन्द व्यास
श्रीमद् भागवत एवं श्रीराम कथा प्रवक्ता
9410882948
आचार्यगुरु ललितानन्द व्यास
श्रीमद् भागवत एवं श्रीराम कथा प्रवक्ता
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