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Monday, 28 March 2016


आचार्यगुरू ललितानन्द 'व्यास'

Sunday, 27 March 2016



 आचार्यगुरु ललितानंद 'व्यास' 





सनातन राष्ट्र धर्म संस्कृति की सेवा में समर्पित --------- 

                     
                          श्रीमद्भागवत एवं श्रीराम कथा प्रवक्ता

                       आचार्यगुरु ललितानंद 'व्यास '

             वेद , कर्मकांड , ज्योतिष ,व्याकरणाचार्य [नरवर,नरोरा ] तंत्र , मन्त्र , यंत्र ,  [ श्री काशी ],
                           रत्न , रुद्राक्ष , ज्योतिष , वास्तु [ जयपुर ] ,
                 संपादक - श्री वैदिक पञ्चाङ्गम [गृहस्थ जंत्री ] , श्री गुरु जी काल निर्णय ,
                           पूर्व प्रधान संपादक -श्री वागनाथ पञ्चाङ्गम ,
                    पूर्व प्रधानाचार्य - श्री विश्वनाथ ज्योतिष-वेद विद्यालय [हरिद्वार ]


ज्योतिष [ जन्म पत्र निर्माण - फलादेश ], तंत्र - मन्त्र - यंत्र , वास्तु , [ गृह निर्माण एवं दोष निवारण ] , रत्न - रुद्राक्ष एवं पूजन , जप , हवन आदि कर्मकांड तथा अध्यात्म से सम्बंधित अन्य समस्याओं - शंकाओं के प्रामाणिक परामर्श एवं समाधान के लिए तथा गौशालाओं की सेवार्थ निःशुल्क श्रीमद भागवत एवं श्री राम कथा आदि ज्ञान यज्ञों के सफल आयोजन के लिए निःसंकोच संपर्क करें ।  
                 
  

Saturday, 26 March 2016

देवताओं को भी दुर्लभ है श्रीमद्भागवत  ........ 
पद्मपुराण में श्री मद्भागवत का माहात्म्य बताते हुए कहा गया है कि ---- श्रीशुकदेवजी जब राजा परीक्षित को कथा सुनाने लगे तब देवता लो उनके पास अमृत का कलश लेकर आये और श्री शुकदेव जी को नमस्कार करके बोले -- आप हमसे ये अमृत ले लीजिए , अज परीक्षित को पिला दीजिये और --
"प्रपास्यामो वयं सर्वे  श्रीमद्भागवतामृतम् "  बदले में यह श्रीमद्भागवत कथा रुपी  अमृत  हमको पिला दीजिये !!
 शुकदेव जी ने विचार किया  -----  क्व सुधा क्व कथा लोके क्व कांच: क्व मणिर्महान !!  कहाँ सुधा [ अमृत ] और कहाँ कथा ? कहाँ काँच और कहाँ मणि ? मणि का मुकाबला काँच  कर सकता है  क्या ? कथा का मुकाबला अमृत कर सकता है क्या ? 
ये विचार करके श्री शुकदेव जी ने व्यापारी बन कर आये देवताओं को भक्ति रहित , अनधिकारी जान कर कथा रुपी  अमृत प्रदान नहीं किया ! स्वर्ग का अमृत ठुकरा दिया ! 
इसीलिये कहा है ----- श्रीमद्भागवती वार्ता सुराणामपि  दुर्लभा !! 
श्रीमद्भागवत की कथा देवताओं  को  भी दुर्लभ है 

Friday, 25 March 2016

 नवरात्र पूजन मुहूर्त  .......... 
०८ अप्रैल २०१६ शुक्रवार से चैत्र [बासंत ] नवरात्र प्रारम्भ हो रहे हैं !! 
शास्त्रानुसार सूर्योदय के बाद की १० घटी अर्थात ०४ घंटे तक या दोपहर में  अभिजित मुहूर्त के समय  चैत्र [ बासंत ] नवरात्र आरम्भ व कलश स्थापन किया जाता है !!  
शास्त्रानुसार इस विहित काल में प्रतिपदा तिथि  प्रारम्भ की १६ घटी अर्थात  घंटा २४ मिनिट तथा चित्रा नक्षत्र  वैधृति योग का समय जहां तक संभव हो त्याग करना चाहिए धर्म सिन्धु  में लिखा है ----- 

प्रति पाद्य षोडश नाड़ी निषेधः चित्रा वैधृति योग निषेधश्च उक्त कालानुरोधेन सति  संभवे पालनीयः ! न तु निषेधानुरोधेन पूर्वान्ह।  प्रारम्भ काल प्रतिपत तिथिर्वा अति क्रमणीयः !! 
इस वर्ष  चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ०८ अप्रैल २०१६ शुक्रवार के दिन  अश्विनी नक्षत्र तो शुभ है किन्तु निषिद्ध वैधृति योग प्रातः १० - ४० तक है !! 
 वैसे तो शास्त्रों में चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग का पूर्वार्ध भाग तथा प्रतिपदा  की प्रारम्भिक १६ घटी [ या कम से कम १२ घटी ] को ही विशेष रूप से त्याज्य माना है तथापि ,, कुछ विद्वान  चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग के सम्पूर्ण काल को दूषित मानते हैं !!
इसलिए जहां तक संभव हो सके ०८ अप्रैल २०१६ शुक्रवार को वैधृति  का समय त्याग कर प्रातः १० - ४० के बाद [ मिथुन या कर्क लग्न अथवा अभिजित में ] नवरात्रारम्भ / कलश स्थापना करनी चाहिए !!  

>>>>>> ध्यान रखें कि  ०८ अप्रैल २०१६ शुक्रवार के दिन चित्रा नक्षत्र तो है  ही नहीं ,, वैधृति योग का निषिद्ध पूर्वार्ध भाग तथा प्रतिपदा  की निषिद्ध प्रारम्भिक १६ घटी भी सूर्योदय के समय तक निकल चुकी हैं अतः अगर आप चाहें तो  ०८ अप्रैल २०१६ शुक्रवार के दिन १० -४० से पूर्व  भी नवरात्रारम्भ / कलश स्थापना कर सकते हैं ये स्थिति भी शास्त्र मान्य है !!!  
 बासंत नवरात्रों की शुभ कामनाओं  सहित _______ 
जय जय श्री राधे  .......  !!  


जय जय  श्री राधे ..... 

Wednesday, 23 March 2016

आज चन्द्र  ग्रहण नहीं  
 पिछले दो   दिनों से हमसे लोग जानना चाह रहे थे की क्या होली वाले दिन ग्रहण है ?? हमने  पूछा की कोन कह रहे हैं  तो पता चला की न्यूज चैनलों पर बैठे तथाकथित धूर्त ज्योतिषियों ने ग्रहण ग्रहण चिल्लाकर भारतीय जन मानस को व्यर्थ मैं ही भ्रांत कर रखा  है !! वो हर राशी पर इसका दुखद या सुखद परिणाम भी बता रहे हैं और  साथ  ही साथ जो  है ही नहीं ऐसे  ग्रहण के दुष्परिणाम से बचने के उपाय भी बता रहे थे !! आइये हम चर्चा करते है की क्या होली के दिन ग्रहण है भी या  नहीं .....
खगोलिय घटना के तहत आज  23 मार्च को   दोपहर 3.07 से शाम 7.27 बजे तक चन्द्रमा पृथ्वी के प्रतिच्छाया वालें हिस्से से गुजरेगा, लेकिन   इसे ग्रहण नहीं माना जाता।  
चन्द्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा को सूर्य तथा चन्द्रमा के मध्य पृथ्वी के आने पर होता है। 

इस स्थिति में यदि सूर्य चन्द्रमा तथा पृथ्वी तीनों के केन्द्र एक सीध में होते हैं तो पूर्ण ग्रहण होता है, अन्यथा पृथ्वी का जितना भाग चन्द्रमा की सीध में होता है उसी के अनुसार आंशिक ग्रहण होता है।
 

प्रतिच्छाया की स्थिति में कोई भाग एक सीध में नहीं होता है।
खगोलीय दृष्टि से प्रतिच्छाया वाले भाग से चन्द्रमा का गुजरना केवल गणना की स्थिति है। इसे न ग्रहण माना जाता, न ही इसका कोई प्रभाव होता है। 

Monday, 21 March 2016

होलिका दहन 22 या 23 कब किया जाये ???? 


उत्तर भारत के [ जो हमारे पास उपस्थित हैं , लगभग ]  सभी प्रामानिक पंचांग जैसे --- श्री मार्तण्ड  पंचान्ग ,, श्री विश्व विजय पंचांग ,, श्री  दिवाकर  पंचान्ग ,, श्री  राजधानी/ ब्रज भुमि ,,  नीमच आदि के पंचांगो मैं भी   होलिकादहन स्पष्ट रूप से 23 मार्च का ही लिखा है ,,, 


यहाँ तक की   श्रीमार्तण्ड  पंचान्ग  एवं  श्रीदिवाकर  पंचान्ग मैं तो होलिकादहन के दिन / तारीख के स्पष्टीकरण के लिए प्रामाणिक लेख भी दिया गया  है .... 


भारतीय संस्कृति के विरोधी टीवी चैनलों पर बैठ कर  और अखबारों के माध्यम से 22 मार्च को होलिकादहन बताने  वाले ये तथाकथित धूर्त ज्योतिषी क्या   कोई भी पंचांग नहीं रखते ??  या खुद को इन पंचांग गणित कर्ताओ  से ज्यादा योग्य  दिखाकर व्रत  पर्व के दिन / तारीखों के बारे  मैं भारतीय जन  मानस को भ्रांत करना  और भारतीय ज्योतिष व्रत  पर्व और पंचांगों का उपहास उड़ाना  ही इनका ध्येेय है ...  


व्रत पर्वो के बारे मैं   प्रामाणिक पंचांगों  द्वारा निधारित दिन तारीखों को गलत सिद्ध  करने वाले इन अखबारी और मीडियाई तथाकथित धूर्त ज्योतिषीयो द्वारा कोई भी पंचांग की गणित या व्रत पर्वो के निर्धारण करने वाले ग्रंथो से परिचय भी नहीं  दिखाई देता ..... 


केवल विदेशी पैसो के बल पर भारतीय संस्कृति की  विकृति को दिखने वाले  ये  चैनल किसी प्रामाणिक पंचांग करता को कभी अपने चैनल पर नहीं बुलाते ,,,


 हल्दी की एक गाँठ लेकर बने हुए पंसारी  की तरह के तथाकथित धूर्त ज्योतिषी इन चैनल वालो को खूब प्राप्त  हो जाते हैं 
 

आप सभी श्रद्धालु जनो  से विनम्र  निवेदन और आग्रह है की इन अखबारी और मीडियाई तथाकथित धूर्त ज्योतिषीयो  के द्वारा फैलाये जा रहे इन अप्रामाणिक निर्देशो  को स्वीकार करने से पूर्व अपने निकटतम किन्ही सुयोग्य ज्योतिषी महानुभाव से पूछिये की ---


 श्री मार्तण्ड  पंचान्ग ,, श्री विश्व विजय पंचांग ,, श्री  दिवाकर  पंचान्ग ,, श्री  राजधानी/ ब्रज भुमि ,,  नीमच आदि पंचांगों मैं होलिकादहन किस दिन है ?? 


आप खुद सुनेंगे की वो 23 मार्च को ही होलिकादहन बताएँगे --- अंतर सिर्फ इतना है की परम्परा के अनुसार ज्यादातार  स्थानो पर लोग देर रात को होलिकादहन करते हैं 


किन्तु इस वर्ष 23  मार्च को सांय 05 से 05 - 30 तक  होलिकादहन [[ धर्मसिंधु , वर्षकृत्य , ब्रह्मवैवर्त पुराण , भविष्योत्तर पुराण , पुरुषार्थ चिंतामणि आदि ]] शाश्त्रो द्वारा  अनुमोदित और आदेशित है !!