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Saturday, 20 January 2018
बसंत पंचमी का पर्व 22 जनवरी 2018 सोमवार को मनाया जायेगा | बसंत पंचमी को श्री पंचमी भी कहा जाता है | इस दिन पढ़ाई - लिखाई से सम्बंधित जैसे, छात्र-छात्राएं , वकील ,लेखक ,सम्पादक , सभी को सरस्वती पूजन करना चाहिए | इस दिन हमें अपनी सभी पढ़ाई - लिखाई से सम्बंधित पुस्तकों , सामग्री आदि को स्वच्छ करना चाहिये | माँ सरस्वती के चित्र या प्रतिमा पर रोली/चन्दन से तिलक लगा कर पुष्पमाला पहनाये |
कुछ मिष्ठान का भोग लगाए | आरती करें | माँ सरस्वती का कोई भी स्तोत्र/ श्लोक गाये | माँ सरस्वती से विद्या बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करें |
31 जनवरी 2018 बुधवार को माघी पूर्णिमा के दिन होने वाला चंद्रग्रहण पूरे भारत वर्ष में प्रभावी होगा |
ये चंद्रग्रहण 31 जनवरी 2018 बुधवारको शाम 05 बज कर 18 मिनट से प्रारम्भ होकर रात्री 08 बज कर 42 तक रहेगा | इस चंद्रग्रहण का सूतक सामान्य नियमानुसार 31 जनवरी 2018 बुधवार को प्रातः 08 बज कर 18 मिनट से प्रारम्भ होगा, किन्तु कुछ विद्वानों के मत से इस ग्रहण का सूतक सामान्य प्रातः सूर्योदय से प्रारम्भ माना जाएगा |
कर्क राशि वालों को ये ग्रहण कष्टप्रद हो सकता है | इस संबंध में विशेष विचार विमर्श हेतु आप वैदिक साधना पीठ पर संपर्क कर सकते हैं। .
Tuesday, 16 January 2018
आचार्यगुरु ललितानन्द 'व्यास': क्यों होता है व्रत पर्व के पुण्यकाल / दिवस आदि में...
आचार्यगुरु ललितानन्द 'व्यास': क्यों होता है व्रत पर्व के पुण्यकाल / दिवस आदि में...: क्यों होता है व्रत पर्व के पुण्यकाल / दिवस आदि में मतभेद /वैमत्य ?? सनातन हिन्दू धर्म की एक पहचान विभिन्न व्रत पर्वों से भी होती है | सना...
क्यों होता है व्रत पर्व के पुण्यकाल / दिवस आदि में मतभेद /वैमत्य ??
सनातन हिन्दू धर्म की एक पहचान विभिन्न व्रत पर्वों से भी होती है |
सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार यदि देखा जाए तो प्रत्येक दिन ही कोई न कोई व्रत पर्व त्यौहार की उपस्थिति प्राप्त होती है|
इसलिए सनातन हिन्दू धर्म को व्रत पर्वों का धर्म कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी ||
व्रत पर्वों से भरपूर सनातन धर्म के इन व्रत पर्वों में कभी-कभी किसी-किसी व्रत पर्व के पुण्यकाल, दिन के सम्बन्ध में मतभेद हो जाने से सम्बंधित व्रत पर्व दो दिन मना लिया जाता है , जोकि शास्त्रानुसार कदापि उचित नहीं |
किन्तु यहाँ प्रश्न ये उठता है कि किसी भी व्रत पर्व को दो दिन मनाये जाने की मति समाज में कैसे , कहाँ से प्राप्त होती है ?
क्या इस सम्बन्ध में सनातन हिन्दू समाज दोषी है ?
इसके पीछे क्या कारण है ?
आइये ! इस सम्बन्ध में कुछ चर्चा करते हैं ----
सनातन हिन्दू धर्म की एक पहचान विभिन्न व्रत पर्वों से भी होती है |
सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार यदि देखा जाए तो प्रत्येक दिन ही कोई न कोई व्रत पर्व त्यौहार की उपस्थिति प्राप्त होती है|
इसलिए सनातन हिन्दू धर्म को व्रत पर्वों का धर्म कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी ||
व्रत पर्वों से भरपूर सनातन धर्म के इन व्रत पर्वों में कभी-कभी किसी-किसी व्रत पर्व के पुण्यकाल, दिन के सम्बन्ध में मतभेद हो जाने से सम्बंधित व्रत पर्व दो दिन मना लिया जाता है , जोकि शास्त्रानुसार कदापि उचित नहीं |
किन्तु यहाँ प्रश्न ये उठता है कि किसी भी व्रत पर्व को दो दिन मनाये जाने की मति समाज में कैसे , कहाँ से प्राप्त होती है ?
क्या इस सम्बन्ध में सनातन हिन्दू समाज दोषी है ?
इसके पीछे क्या कारण है ?
आइये ! इस सम्बन्ध में कुछ चर्चा करते हैं ----
Monday, 15 January 2018
Tuesday, 9 January 2018
श्री गायत्री मंदिर के वार्षिकोत्सव के अवसर पर श्रीमद भागवत कथा का आयोजन सनातन हिन्दू धर्म राष्ट्र संस्कृति की सेवा में
समर्पित "वैदिक साधना पीठ" नरोरा के आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी महाराज
के सानिध्य में किया जाएगा | इस परम पवित्र पुण्य पर्व पर आयोजित इस
दिव्य अनुष्ठान में आप सभी सपरिवार सपरिकर सादर आमंत्रित हैं। .......
मकर संक्रांति के पुण्य अवसर पर "अष्टोत्तर सहस्र [1008] श्री हनुमान चालीसा पाठ" का आयोजन सनातन हिन्दू धर्म राष्ट्र संस्कृति की सेवा में समर्पित "वैदिक साधना पीठ" नरोरा के आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी महाराज के सानिध्य में किया जाएगा | इस परम पवित्र पुण्य पर्व पर आयोजित इस दिव्य अनुष्ठान में आप सभी सपरिवार सपरिकर सादर आमंत्रित हैं। .......
Friday, 5 January 2018
हिंदुओ को भ्रमित कर रहे ऐसे श्लोक ...
200 वर्षों से अंग्रेजों की जीत का जश्न मना रहे धूर्त दलितों की भाँति, अंग्रेजियत / मुगलिया बुद्धि से पूर्ण किसी छद्म धूर्त विद्वान द्वारा रचित पूर्ण अप्रामाणिक, कपोल कल्पित, भारतीय संस्कृति को छिन्न-भिन्न करने में सहायक नीचे दिए गए श्लोक को वो ही लोग / विद्वान सार्थक कह रहे हैं .... जो गौघृत का दीप उपस्थित होने पर भी पशुओं की चर्वी युक्त मोमबत्ती को जलाकर कहते होंगे .... " दीपो ज्योति परब्रह्म। दीपो ज्योति जनार्दन"।।
>> इस श्लोक को सार्थक कहने वाले महानुभाव ये तक नहीं बता पा रहे कि ये श्लोक किस ने रचा ?
>> इस श्लोक को रचने की आवश्यकता क्यों पड़ी ?
>> इस श्लोक का अशुभ दर्शन हम [ सनातन हिन्दू धर्म राष्ट्र संस्कृति के प्रति लोगो का समर्पण वृद्धि के कुछ समय बाद से ही ] विगत 02/03 वर्षों से ही कर रहे हैं..
>> क्या इतना पर्याप्त नहीं इस श्लोक और इसके धूर्त रचयिता के मंतव्य को स्पष्ट करने के लिए। ........
>>> खुद को धरती पुत्र और पूरे विश्व को परिवार मानकर रहने की बात करने वाला ये धूर्त श्लोक रचयिता और इस श्लोक को सार्थक कहने वाले उदार चरित महामना बताएँगे >>> कश्मीर [ की धरती ] को अपनी मां, अपना परिवार कहने वाले हिन्दू कश्मीर की धरती से क्यों भगाये गए। ...
शायद उस समय उन कश्मीरी हिन्दुओं के पास ये श्लोक और इस श्लोक की सार्थकता सिद्ध करने वाले नहीं होंगे, अन्यथा हैप्पी न्यू ईयर और ईद मुबारक कहते रहने के बाद भी कश्मीरी हिन्दुओं को भागना और मरना नहीं पड़ता ||
200 वर्षों से अंग्रेजों की जीत का जश्न मना रहे धूर्त दलितों की भाँति, अंग्रेजियत / मुगलिया बुद्धि से पूर्ण किसी छद्म धूर्त विद्वान द्वारा रचित पूर्ण अप्रामाणिक, कपोल कल्पित, भारतीय संस्कृति को छिन्न-भिन्न करने में सहायक नीचे दिए गए श्लोक को वो ही लोग / विद्वान सार्थक कह रहे हैं .... जो गौघृत का दीप उपस्थित होने पर भी पशुओं की चर्वी युक्त मोमबत्ती को जलाकर कहते होंगे .... " दीपो ज्योति परब्रह्म। दीपो ज्योति जनार्दन"।।
>> इस श्लोक को सार्थक कहने वाले महानुभाव ये तक नहीं बता पा रहे कि ये श्लोक किस ने रचा ?
>> इस श्लोक को रचने की आवश्यकता क्यों पड़ी ?
>> इस श्लोक का अशुभ दर्शन हम [ सनातन हिन्दू धर्म राष्ट्र संस्कृति के प्रति लोगो का समर्पण वृद्धि के कुछ समय बाद से ही ] विगत 02/03 वर्षों से ही कर रहे हैं..
>> क्या इतना पर्याप्त नहीं इस श्लोक और इसके धूर्त रचयिता के मंतव्य को स्पष्ट करने के लिए। ........
>>> खुद को धरती पुत्र और पूरे विश्व को परिवार मानकर रहने की बात करने वाला ये धूर्त श्लोक रचयिता और इस श्लोक को सार्थक कहने वाले उदार चरित महामना बताएँगे >>> कश्मीर [ की धरती ] को अपनी मां, अपना परिवार कहने वाले हिन्दू कश्मीर की धरती से क्यों भगाये गए। ...
शायद उस समय उन कश्मीरी हिन्दुओं के पास ये श्लोक और इस श्लोक की सार्थकता सिद्ध करने वाले नहीं होंगे, अन्यथा हैप्पी न्यू ईयर और ईद मुबारक कहते रहने के बाद भी कश्मीरी हिन्दुओं को भागना और मरना नहीं पड़ता ||
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