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Thursday, 25 October 2018

आश्विन पूर्णिमा अर्थात शरद पूर्णिमा को वैदिक साधना पीठ पर आचार्यगुरु ललिततानन्द जी महाराज के निर्देशन में माँ राज राजेश्वरी , गवाभन शिव का पूजन किया गया |

बाल्मीकि जयन्ती
सृष्टि के प्रथम कवि, प्रचेता पुत्र, ब्राह्मण शिरोमणि, रामायण के रचयिता श्रीबाल्मीकि जी के जन्म [ 24 अक्टूबर 2018 बुधवार, आश्विन पूर्णिमा ] उत्सव पर वैदिक साधना पीठ के आचार्यगुरु ललितानंद जी महाराज की ओर से आप सभी को बहुत बहुत हार्दिक शुभ कामनायें |

Monday, 3 September 2018

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की हार्दिक शुभ कामनाएं

Sunday, 29 July 2018

श्री गुरु पूर्णिमा के दिव्य पावन अवसर पर वैदिक साधना पीठ- नरौरा पर आगरा, हरिगढ़, आदि स्थानों से पधारे सनातन धर्म प्रेमी श्रद्धालु भक्तजनों ने आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी महाराज के निर्देशन में श्री गणपति स्मरण पूर्वक सृष्टि के सर्वप्रथम गुरु देवाधिदेव महादेव का पूजन किया |  इसके उपरांत ज्ञानियों में अग्रगण्य श्री हनुमान जी महाराज के श्री चरणों में वंदन स्वरूप श्री हनुमान चालीसा का पाठ किया गया | सभी शिष्य, यजमान, भक्तजनों ने आचार्यगुरु ललितानंद जी के प्रति यथा शक्ति श्रद्धा सुमन अर्पित करेक उनका आशीर्वाद प्राप्त किया |

आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से गुरु की आवश्यकता पर प्रकाश डाला | उन्होंने बताया की गुरु शिष्य एक परम्परा है जो सृष्टि काल से चली आ रही है | गुरु शिष्य  परम्परा सनातन हिन्दू धर्म की तो नींव है | शिष्य को गुरु से सभी अच्छी बातें ले लेनी चाहिए | यदि गुरु में कोई बुराई हो तो उसको ग्रहण नहीं करना चाहिए | गुरु भगवत्प्राप्ति/आत्मशांति/ के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है | गुरु भगवान नहीं है |  जो भी गुरु अपने चित्र की पूजा करवाए, गले में पहनाये, भगवान से ऊपर/ज्यादा खुद को घोषित करे वो गुरु नहीं गुरुर/अभिमानी /अहंकारी /घमंडी होता है | ऐसे गुरुओं से / लोगों से दूर रहना चाहिए |

सबसे महत्त्व पूर्ण और ध्यान देने योग्य बात ये  है की गुरु किसको बनायें, कैसे बनाएं, ये जानकारी वतमान में बहुत काम लोगों को है | आचार्यगुरु जी ने बताया की इन सब बातो की जानकारी सभी आम लोगों को होनी चाहिए इसके लिए सरल हिंदी भाषा में "गुरु किसको बनाएं" नाम की पुस्तक प्रकाशित की गई है | जो गुरु शिष्य परम्परा की आवश्यकता, गुरु की पात्रता, गुरु  मन्त्र आदि के विषय का ज्ञान देगी | आचार्यगुरु जी के प्रवचनों के उपरांत सभी भाई - बहिनों ने भगवद भजनों का वाचन और श्रवण किया | भजनों के वाचन में एंजल प्ले स्कूल की शिक्षिकाओं ने बहुत सुन्दर सहभागिता की |

चूँकि गुरु पूर्णिमा की रात्री में चंद्र ग्रहण होने से सूतक काल दोपहर 02 - 54 से प्रारम्भ होने के कारण सूतक काल प्रारम्भ होने से पूर्व ही सभी उपस्थित जनों को भोजन प्रसाद करके विदा किया गया | कुछ श्रद्धालु आचार्यगुरु जी के सानिद्ध्य में ग्रहण काल में साधना हेतु रुके रहे ||





Sunday, 20 May 2018

श्रीगंगा दशहरा पर्व कब मनाये 24 मई या 22 जून ??
श्रीगंगा दशहरा पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को अधिकमास यानी लोंद के महीने में ही मनाने के लिए धर्म सिंधु आदि ग्रंथों स्पष्ट निर्देश हैं >>>


Monday, 12 February 2018

 
श्रीमहाशिवरात्रि भ्रम निवारण

अलीगढ़ में पत्रकार वार्ता

Wednesday, 7 February 2018

जो भी महानुभाव / आचार्य 13 या 14 फरवरी 2018 दोनो में से किसी भी एक तारीख को ही श्रीमहा शिवरात्री पर्व पूरे भारत वर्ष में मनाने की सूचना प्रसारित कर रहे हैं .. उनसे निवेदन है 13 या 14 फरवरी 2018  दोनो में से किसी भी एक तारीख को ही श्रीमहा शिवरात्री पर्व पूरे भारत में मनाने के सम्बन्ध में शास्त्रीय प्रमाण प्रस्तुत करते हुए समाज को दिग्दर्शन कराएं |

सनातन धर्म - राष्ट्र - संस्कृति की सेवा में समर्पित वैदिक साधना पीठ के आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी के अध्ययनानुसार श्रीमहा शिवरात्री का पर्व भारत में अलग - अलग स्थानो / नगरो में अलग - अलग दिन अर्थात कही 13 फरवरी मंगलवार को और कही 14 फरवरी बुधवार को मनाया जायेगा | इस भेद और अंतर का मूल कारण जानने के लिये तथा भारत वर्ष के किस भाग / नगर में किस दिन श्रीमहा शिवरात्री मनाई जानी चाहिए इसके स्पष्टीकरण के लिए नीचे दिये गये लेख को  ध्यान से पढ़ने का कष्ट करें >>>


Saturday, 3 February 2018

शिवरात्रि कब मनाये 13 फरवरी या 14 फरवरी----
प्रत्येक स्थान के अक्षांश - रेखांश, सूर्योदय - सूर्यास्त, दिनमान अलग -अलग होने से प्रत्येक स्थान पर अर्द्ध रात्रि का समय अलग अलग होता है || जिन नगरों का रेखांश 80 अंश से काम है वहां महाशिव रात्रि 13 फरवरी को तथा जिन नगरों का रेखांश 80 अंश से ज्यादा है वहां महाशिव रात्रि 14  फरवरी को मनाया जाना ही शास्त्र सम्मत है || 



विशेष है शिवरात्रि  इस वर्ष ------
निर्णय सिंधु में लिखा है --  इयं च रवि भौम सोमवारेषु शिव योगे चाति प्रशास्ता || अर्थात- यदि शिवरात्रि रविवार,  भौमवार, सोमवार, और शिव योग में हो तो अति उत्तम मानी जाती है | कुंडली में मंगल अशुभ हो, मंगली योग हो, भूमि - वाहन - बुद्धि - माता - ह्रदय रोग आदि समस्या हो तो इस भौमवती महाशिवरात्रि  पर शिवलिंग पूजन अभिषेक कराना लाभप्रद रहेगा ||

Saturday, 20 January 2018

श्री श्री यंत्र की अधिष्ठात्री देवी माँ ललिता की जयन्ती माघी पूर्णिमा के अनुसार 21 जनवरी 2018 , बुधवार को मनाई जाएगी | श्री श्री यंत्र की उपासना से साधक को अपनी पात्रता के अनुसार सभी प्रकार के दैविक भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है | क्योकि इस वर्ष माघी पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण भी हो रहा है , इसलिए इस महान पुण्य अवसर पर विशेष सामग्रियों द्वारा माँ को आहुति प्रदान की जाएंगी |
बसंत पंचमी का पर्व 22 जनवरी 2018  सोमवार को मनाया जायेगा | बसंत पंचमी को श्री पंचमी भी कहा जाता है | इस दिन पढ़ाई - लिखाई से सम्बंधित जैसे,  छात्र-छात्राएं , वकील ,लेखक ,सम्पादक , सभी को सरस्वती पूजन करना चाहिए | इस दिन हमें अपनी सभी पढ़ाई - लिखाई से सम्बंधित पुस्तकों , सामग्री आदि को स्वच्छ करना चाहिये | माँ सरस्वती के चित्र या प्रतिमा पर रोली/चन्दन से तिलक लगा कर पुष्पमाला पहनाये |
कुछ मिष्ठान का भोग लगाए | आरती करें | माँ सरस्वती का कोई भी स्तोत्र/ श्लोक गाये | माँ सरस्वती से विद्या बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करें |

31 जनवरी 2018  बुधवार को माघी पूर्णिमा के दिन होने वाला चंद्रग्रहण पूरे भारत वर्ष में प्रभावी होगा |
ये चंद्रग्रहण 31 जनवरी 2018  बुधवारको शाम 05 बज कर 18 मिनट से प्रारम्भ होकर रात्री 08 बज कर 42 तक रहेगा | इस चंद्रग्रहण का सूतक सामान्य नियमानुसार 31 जनवरी 2018  बुधवार को प्रातः 08 बज कर 18 मिनट से प्रारम्भ होगा, किन्तु कुछ विद्वानों के मत से इस ग्रहण का  सूतक सामान्य  प्रातः सूर्योदय से प्रारम्भ माना जाएगा |
कर्क राशि वालों को ये ग्रहण कष्टप्रद हो सकता है | इस संबंध  में विशेष विचार विमर्श हेतु आप वैदिक साधना पीठ पर संपर्क कर सकते हैं। .

Wednesday, 17 January 2018

वैदिक साधना पीठ पर आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी के निर्देशन में माघी [ मौनी ] अमावस्या को दिल्ली आगरा आदि स्थानों से आये भक्तों के द्वारा भगवान आशुतोष का अभिषेक किया गया। ..

Tuesday, 16 January 2018

आचार्यगुरु ललितानन्द 'व्यास': क्यों होता है व्रत पर्व के पुण्यकाल / दिवस आदि में...

आचार्यगुरु ललितानन्द 'व्यास': क्यों होता है व्रत पर्व के पुण्यकाल / दिवस आदि में...: क्यों होता है व्रत पर्व के पुण्यकाल / दिवस आदि में मतभेद /वैमत्य ?? सनातन हिन्दू धर्म की एक पहचान विभिन्न व्रत पर्वों से भी होती है | सना...
क्यों होता है व्रत पर्व के पुण्यकाल / दिवस आदि में मतभेद /वैमत्य ??
सनातन हिन्दू धर्म की एक पहचान विभिन्न व्रत पर्वों से भी होती है |
सनातन हिन्दू धर्म के अनुसार यदि देखा जाए तो प्रत्येक दिन ही कोई न कोई व्रत पर्व त्यौहार की उपस्थिति प्राप्त होती है|
इसलिए सनातन हिन्दू धर्म को व्रत पर्वों का धर्म कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी ||
व्रत पर्वों से भरपूर सनातन धर्म के इन व्रत पर्वों में कभी-कभी किसी-किसी व्रत पर्व के पुण्यकाल, दिन के सम्बन्ध में मतभेद हो जाने से सम्बंधित व्रत पर्व दो दिन मना लिया जाता है , जोकि शास्त्रानुसार कदापि उचित नहीं |
किन्तु यहाँ प्रश्न ये उठता है कि  किसी भी व्रत पर्व को दो दिन मनाये जाने की मति समाज में कैसे , कहाँ से प्राप्त होती है ?
क्या इस सम्बन्ध में सनातन हिन्दू समाज दोषी है ?
इसके पीछे क्या कारण है ?
आइये ! इस सम्बन्ध में कुछ चर्चा करते हैं ----





Tuesday, 9 January 2018

श्री गायत्री मंदिर के वार्षिकोत्सव के अवसर पर श्रीमद भागवत कथा का आयोजन सनातन हिन्दू धर्म राष्ट्र संस्कृति की सेवा में समर्पित "वैदिक साधना पीठ" नरोरा के आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी महाराज के सानिध्य में किया जाएगा |  इस  परम पवित्र पुण्य पर्व पर आयोजित इस दिव्य अनुष्ठान में आप सभी सपरिवार सपरिकर सादर आमंत्रित हैं। .......


मकर संक्रांति के पुण्य अवसर पर "अष्टोत्तर सहस्र [1008] श्री हनुमान चालीसा पाठ" का आयोजन सनातन हिन्दू धर्म राष्ट्र संस्कृति की सेवा में समर्पित "वैदिक साधना पीठ" नरोरा के आचार्यगुरु ललितानंद व्यास जी महाराज के सानिध्य में किया जाएगा |  इस  परम पवित्र पुण्य पर्व पर आयोजित इस दिव्य अनुष्ठान में आप सभी सपरिवार सपरिकर सादर आमंत्रित हैं। .......



Friday, 5 January 2018

हिंदुओ को भ्रमित कर रहे ऐसे श्लोक ...
200 वर्षों से अंग्रेजों की जीत का जश्न मना रहे धूर्त दलितों की भाँति, अंग्रेजियत / मुगलिया बुद्धि से पूर्ण किसी छद्म धूर्त विद्वान द्वारा रचित पूर्ण अप्रामाणिक, कपोल कल्पित, भारतीय संस्कृति को छिन्न-भिन्न करने  में सहायक नीचे दिए गए श्लोक को वो ही लोग / विद्वान सार्थक कह रहे हैं .... जो गौघृत का दीप उपस्थित होने  पर भी पशुओं की चर्वी युक्त मोमबत्ती को जलाकर कहते होंगे .... " दीपो ज्योति परब्रह्म। दीपो ज्योति जनार्दन"।।
>> इस श्लोक को सार्थक कहने वाले महानुभाव ये तक नहीं बता पा रहे कि ये श्लोक किस ने रचा ?
>> इस श्लोक को रचने की आवश्यकता क्यों पड़ी ?
>> इस श्लोक का अशुभ दर्शन हम [ सनातन हिन्दू धर्म राष्ट्र संस्कृति के प्रति लोगो का समर्पण वृद्धि के कुछ समय बाद से ही ]  विगत 02/03  वर्षों से ही कर रहे हैं..
>> क्या इतना पर्याप्त नहीं इस श्लोक और इसके धूर्त रचयिता के मंतव्य को स्पष्ट करने के लिए। ........
>>>  खुद को धरती पुत्र और पूरे विश्व को परिवार मानकर रहने की बात करने वाला ये धूर्त श्लोक रचयिता और इस श्लोक को सार्थक कहने वाले उदार चरित महामना बताएँगे >>>  कश्मीर [ की धरती ] को अपनी मां, अपना परिवार कहने वाले हिन्दू कश्मीर की धरती से क्यों भगाये गए। ...
शायद उस समय उन कश्मीरी हिन्दुओं के पास ये श्लोक और इस श्लोक की सार्थकता सिद्ध करने वाले नहीं होंगे, अन्यथा हैप्पी न्यू ईयर और ईद मुबारक कहते रहने के बाद भी कश्मीरी हिन्दुओं को भागना और मरना नहीं पड़ता ||  

Wednesday, 3 January 2018

सनातन  हिन्दू नव वर्ष 01 जनवरी को नहीं होता अपितु चैत्र शुक्ल प्रतिपदा , प्रथम नवरात्री को होता है || 
अतः अंग्रेजी दिनांक के अनुसार 18 मार्च 2018, रविवार को होगा







सनातन  हिन्दू नव वर्ष 01 जनवरी को नहीं होता अपितु चैत्र शुक्ल प्रतिपदा , प्रथम नवरात्री को होता है || 
अतः अंग्रेजी दिनांक के अनुसार 18 मार्च 2018, रविवार को होगा